दिल्ली दंगो का सच…

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राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र ने चंद दिनों पहले 1984 के सिक्ख नरसंहार के बाद सबसे भयानक दंगे देखे CAA  के विरोध के नाम पर इन दंगों की नींव 70 दिन पहले ही शाहीन बाग़ में रख दी गयी थी। जहां CAA के विरोध के नाम पर राजधानी की मुख्य सड़क को बंधक बना कर आज़ादी के नारे लगाये जा रहे थे… इन दंगों की स्क्रिप्ट शाहीन बाग़ में लिखी गईं थीं बस समय का इंतजार था और ये समय चुना गया अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप का भारत दौरा ताकि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को खराब किया जा सके ।

दंगो का माहौल बनाना

शाहीन बाग़ में बैठे प्रदर्शनकारियों पर केंद्र व राज्य सरकार का ढुलमुल रवैया उनकी हिम्मत को और बढ़ाता है और 22 फ़रवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली की एक और मुख्य सड़क जाफराबाद मार्ग को भी प्रदर्शनकारी बंद कर वहां स्टेज सजा कर बैठ जाते हैं शाहीन बाग़ की तरह ही यहां पर भी प्रदर्शन करने के लिये औरतों और बच्चों को बैठाया  जाता है और दंगो के मुख्य चेहरे पीछे किसी और ही तैयारी में लगे हुए थे । दूसरी तरफ से भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा के प्रदर्शनकारियों को सड़क खाली करने की चेतावनी देते हुये CAA के समर्थन में मौजपुर रेड लाइट पर बैठने का ऐलान किया….

दंगो की तयारी

अगर आपको लगता की यह सब CAA के‌‌ विरोध प्रदर्शन की वज़ह से हुआ जिसने अचानक ही हिंसा का रूप ले लिया तो आप गलत हैं दरअसल इसकी तैयारी पहले से ही कर ली गई थी…

  • बाहर से लोगो को पहले ही बुला कर रख लिया गया था ।
  • अवैध हथियारों ज़ख़ीरा घरों में जमा कर के रखा गया था ।
  • कई ट्रुक और ट्रैक्टर भर कर पत्थर पहले से मंगा कर रख लिये थे ।
  • मुस्लिम बहुल इलाकों में घरों में पेट्रोल बम तैयार कर के रखे गये थे ।
  • कई मुस्लिम इलाके में मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों को उस दिन स्कूल भी नहीं भेजा जैसे इन दंगो का इन लोगो को पहले से पता था ।

दंगों की शुरुआत

23 फ़रवरी को बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा CAA समर्थकों के साथ मौजपुर रेड लाइट पर जमा हो जाते हैं जबकि दूसरी तरफ 500 मीटर की दूरी जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे ‌CAA के विरोध में भी प्रदर्शनकारी पहले से जमा थे यहां से शुरू होता है दोनों तरफ से नारों का दौर था।

अब यहां पर दंगों को समझने के लिए दो समुदायों का नाम लेना आवश्यक हो जाता है एक तरफ मौजपुर रेड लाइट पर कपिल मिश्रा के साथ CAA के  समर्थन में था हिन्दू समुदाय तो दूसरी तरफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे CAA के विरोध में था मुस्लिम समुदाय और दोनों तरफ से नारेबाज़ी का दौर यहां तक ये सब बिना किसी हिंसा के हो रहा था । तभी मौजपुर के पास स्थित मुस्लिम बहुल क्षेत्र कर्दंपुरी से हिंदुओं पर पथ राव शुरू हो जाता है यहां से होती है हिंसा भड़काने की शुरुआत दोनों तरफ से भयंकर पत्थर बाज़ी होती है इसी पत्थर बाज़ी के बीच फ़ायरिंग भी शुरू हो जाती है इसके बाद शुरू 24 और 25 फरवरी के उत्तर पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर भयंकर दंगों का मंज़र इसके प्रमुख इलाके थे जाफराबाद, मौजपुर, भजनपुरा, गोकुलपुरी, चांदबाग, खजुरी, बृजपुरी, शिव विहार, करावल नगर ।

ध्यान रहे ये वो समय था जब डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे और दिल्ली में ही मौजूद थे पूर्वी दिल्ली के इन इलाकों में  पत्थर बाज़ी, आगजनी और हत्याओं का दौर शुरू हो गया चांद बाग, शिव विहार, खजुरी, करावल नगर, भजनपुरा इन इलाकों में हिन्दू समुदाय को खास तौर पर निशाना बनाते हुए इन पर हमले किए चुन चुन कर सिर्फ हिंदुओं के घर, दुकान व वाहन जलाए गए चांद बाग से आती हुई  मुस्लिम भीड़ भजनपुरा रेड लाइट पर एक पेट्रोल पंप को आग लगाते हुए हिन्दू बहुल इलाक़ा यमुना विहार की तरफ बढ़ी और इनके‌ घरो व इनके घरों के बाहर खड़े वाहनों में आग लगा दी गई वहीं ब्रह्मपुरी में बजरंग दल के कार्यकर्ता विनोद को उनके बेटे के सामने काट डाला गया जब वो घर से  बाइक पे दवा लेने निकले थे क्योंकि सामने दंगाई भीड़ थी और उनकी बाइक पर है ‘श्री राम’ स्टिकर लगा था बस यही काफी था भीड़ को उनकी पहचान करने के लिए। वहीं गोकुलपुरी इलाके में मुस्लिमो को निशाना बनाते हुए इनके घर व दुकानें जलायी गयीं…

चांद बाग़ की हिंसा व आप पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका

आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन की चांदबाग में हुई हिंसा में मुख्य भूमिका थी यहां 1200 गज में बना ताहिर का मकान आतंक का अड्डा था जहां पर बाहर से तकरीबन 500 लडको को हिंसा के लिए बुलाया गया था ताहिर के घर की छत पर पेट्रोल बम, तेज़ाब की थैलियां, गुलेल व कई हथियार बरामद हुए हैं स्थानीय लोगो के अनुसार ताहिर के घर मौजूद गुंडों ने चुन चुन कर इलाके के हिंदुओ को निशाना बनाया व उनके घर जलाए ताहिर की छत से आस पास के हिंदुओ के घरों, दुकानों पर पेट्रोल बम फेंके गए चांदबाग में रहने वाले आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा समेत 4 हिन्दू की हत्या में भी ताहिर का ही हाथ था इन लोगो को ताहिर के घर में मौजूद गुंडों ने अगवा कर उनकी हत्या कर शव पास ही नाले में फेंक दिय थे । पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अंकित शर्मा को 400 से ज्यादा बार चाकुओं से गोदा गया था…शिव विहार में मुस्लिम दंगाई भीड़ ने एक स्कूल में आग लगा दी जिसका मालिक हिन्दू था जबकि उसके ठीक बगल में दूसरे स्कूल को छोड़ दिया गया क्यूंकि उसका मालिक मुस्लिम था…

ताहिर हुसैन को खुद इसके ही पड़ोसियों ने अपनी आंखो से आतंक फैलाते हुए देखा है व कई वीडियो भी बनाई…जिनके आधार पर पुलिस ने इसके खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज किया जिसके बाद से ताहिर फरार चल रहा है….ताहिर के साथ साथ खुरेजी क्षेत्र से कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां को भी दंगे फैलाने के जुर्म में हिरासत में लिया गया है

कुल मिला कर ये दंगे बड़े ही प्रायोजित तरीके से तैयारी कर के किये गये थे CAA के विरोध के नाम पर ये दंगे देश व हिंदुओ के खिलाफ जंग जैसे थे बड़ी तैयारी के साथ पूर्वी दिल्ली के इलाकों को हिन्दू विहीन कर वहां की डेमोग्राफी को बदलने की साज़िश थी । लोगो के घर, दुकान, वाहन सब कुछ जला कर रख कर दिया गया अरबों रुपए की सम्पत्ति को फूंक दिया गया इस पूरे नुकसान आंकलन करना भी अभी बहुत मुश्किल है। साथ ही इस‌ दंगे ने हंदू मुस्लिम के बीच वो कड़वाहट भर दी है जिसे खत्म होने में शायद काफी वक़्त लग जाये ।