ज़मीन जिहाद: भारत की डेमोग्राफी बदलने का इस्लामिक जिहादियों का षडयंत्र

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जम्मू कश्मीर हमारे देश का अभिन्न अंग राजनीतिक रूप से कितने भयानक षडयंत्र का शिकार हुआ है ये हम सभी जानते हैं कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के नर संहार के बाद किस तरह वहां को भौगोलिक व जनसांख्यिक परिस्थिति को बदल कर वहां इस्लाम को बसा कर हिन्दू विहीन किया गया और इस  षडयंत्र को जम्मू कश्मीर की तत्कालीन सरकार व उस समय की केंद्र की सरकार कांग्रेस चुपचाप देखती रही ये सब इस्लामिक जिहाद का ही हिस्सा था कश्मीर को पूरी तरह से हिन्दू विहीन कर देने के बाद जिहादियों की नजर जम्मू पर थी और वहां जिहाद शुरू किया गया सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर वहां मुस्लिमों को बसा कर।

ये सब एक सोची समझी साज़िश के तहत के तहत किया जा रहा था जम्मू की जंगल ज़मीन पर फारुख अब्दुल्ला सरकार ने कब्ज़ा कर मुस्लिमों को बसाया उन्हें अवैध रूप से बिजली पानी के कनेक्शन दिए गए जम्मू तवी नदी के किनारे अब मुस्लिम बस्तियां बसी हुई हैं और ये वही नदी है जो पाकिस्तान जाती है और इस नदी से ही कई बार पाकिस्तान की तरफ़ से घुसपैठ को कोशिश हुई है तो क्या जानबूझ कर इस इलाक़े में मुस्लिमों को बसाया गया?? इस न्यूज़ को अपनी जान पर खेल कर कवर किया ज़ी न्यूज़ के पत्रकार राहुल सिन्हा ने क्यूंकि इन मुस्लिम इलाकों में ज़ी न्यूज़ का माइक के कर जाना मतलब मौत को दावत देना ये इलाक़े भी लगभग मिनी पाकिस्तान बन ही चुके हैं

 Zee न्यूज के DNA कार्यक्रम में सुधीर चौधरी ने दस्तावेज़ों के साथ यह उजागर किया कि हिन्दू बहुल जम्मू में लगभग 25 हजार करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन केवल 76 करोड़ रूपए में उन लोगों के नाम लिख दी गई जिन्होंने उसपर क़ब्ज़ा कर लिया था. जमीन जिन लोगों को आबंटित की गई उनमें से 90% से अधिक लोग केवल मुसलमान थे. शेष 10% जमीन में हिंदू सिक्ख बौद्ध ईसाई आदि सबको निपटा दिया गया. पहले कांग्रेस+पीडीपी, फिर कांग्रेस+नेशनल कॉन्फ़्रेंस गठबंधन की सरकारों के शासनकाल के दौरान 2003 से 2014 के मध्य 11 वर्ष की समयावधि में घोर सांप्रदायिक आधार पर “अपने आदमियों” से करवाई गई सरकारी जमीन की इस सुनियोजित लूट की रिपोर्ट को DNA में “जमीन जिहाद” के नाम से दिखाया गया था. DNA में दिखाई गई इस रिपोर्ट पर आजतक और इंडिया टुडे न्यूज चैनल का सलाहकार सम्पादक राजदीप बुरी तरह आगबबूला हो गया और उसने दिल्ली पुलिस से Zee न्यूज और सुधीर चौधरी के खिलाफ़ सांप्रदायिकता भड़काने के आरोप में कार्रवाई करने की मांग तक कर डाली ।

सुधीर चौधरी ने अपने इस कार्यक्रम में देश में विभिन्न क्षेत्रो में फैले जिहाद को दिखाया किस तरह जिहादियों ने लगभग हर क्षेत्र में कब्ज़ा किया हुआ है जिस सच्चाई को देख कर मीडिया का एक खास वर्ग बौखला गया ।

राजदीप सरदेसाई  यूपीए शासनकाल में ये कितनी बेशर्मी से सरकारी दलाल की भूमिका निभाया करता था. इसका वो गोरखधंधा पिछले, लगभग 6 सालों से ठप्प पड़ा है इसीलिए अब ऐसी करतूतों पर उतर आया है.

यूपीए शासनकाल में राजदीप सरदेसाई के कुकर्मों की किताब का एक कलंकित पन्ना तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सचिव/सलाहकार संजय बारू  ने अपनी किताब में खोल दिया था.

हमारे देश की मीडिया का एक बड़ा वर्ग अपना एजेंडा चलाने व निजी स्वार्थ में इतना अंधा हो गया है कि उसने देश हित भी ताक पर रख दिया है सीधे सीधे देश के खिलाफ चल रहे षडयंत्र को दिखाने को भी ये कम्युनल पत्रकारिता का नाम देते हैं और खुद मीडिय में बैठ कर अपने आकाओं के एजेंडे को चलाते हैं