वायुसैनिकों की हत्या मामले में आतंकवादी यासीन मलिक पर 30 साल बाद आरोप तय

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कश्मीर में हिंदुओ के हुए नरसंहार को पूरी दुनिया ने देखा पर ना तो उस पर भारत की तत्कालीन केंद्र सरकार ने कुछ किया ओर ना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले पर कुछ हुआ जबकि वो नरसंहार पूरी तरह से स्टेट स्पॉन्सर नरसंहार था जिसका मकसद घाटी को हिंदुओ से खाली कराना था कई दिनों तक कश्मीर में इस्लामिक जिहादियों द्वारा  हिन्दुओं का नरसंहार होता रहा ओर केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार सब देखती रही।

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता और आतंकवादी फारुख अहमद दार उर्फ बिट्टा कराटे ने कैमरे पर कबूल किया है कि 80 के दशक में जब जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआत हुई थी और कश्मीरी पंडित राज्य छोड़कर भाग रहे थे उस वक्त उसने 20 कश्मीरी पंडितों की निर्मम हत्या की थी. 1990 में गिरफ्तार होने के बाद बिट्टा कराटे को जेल भेजा गया था जिसके बाद 2006 में उसको जमानत मिल गई और वह जेल से बाहर आ गया । यासीन मलिक पर भी अब 30 सालों बाद वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या के मामले में आतंकी यासीन मलिक पर चलने की अनुमति मिल गई है आप समझ सकते हैं के 30 सालों से इन आतंकवादियों को किस हद तक सरकार का संरक्षण मिला हुआ था ।

साल 1990, तारीख थी 25 जनवरी. ये दौर था कश्मीर की बर्बादी का. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकियों ने वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या कर दी थी. वही JKLF  जिसने 1989 में तत्कालीन गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी और महबूबा मुफ़्ती की बहन रुबिया सईद का अपहरण कर लिया था और बदले में भारत सरकार ने 5 आतंकी छोड़े थे. वही JKLF जिसने 1989 में जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी थी. इस JKLF का चीफ है यासीन मलिक. जो इन दिनों जेल में बंद है.

अब 30 सालों बाद वायुसेना के अधिकारियों की हत्या के मामले में आतंकी यासीन मलिक के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है. जम्मू की टाडा कोर्ट ने कहा है कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं. 25 जनवरी, 1990 को श्रीनगर के रावलपोरा में वायु सेना के कर्मचारियों पर आतंकवादियों द्वारा गोलीबारी की गई, जिसमें एक महिला सहित 40 को गंभीर चोटें आईं और वायु सेना के चार जवान मारे गए. जांच पूरी होने पर यासीन मलिक और पांच अन्य के खिलाफ जम्मू में टाडा कोर्ट के समक्ष 31 अगस्त, 1990 को आरोप पत्र दायर किया गया था. सालों तक यासीन मलिक को अलगाववादी नेता के रूप में प्रचारित किया जाता रहा. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उसे आमंत्रित कर उससे हाथ मिलाते रहे. लेकिन 2014 में जैसे ही सरकार बदली यासीन मालिक के बुरे दिन शुरू हो गए. टेरर फंडिंग के मामले में वो फिलहाल जेल में बंद है.

बिट्टा कराटे व यासीन मलिक जैसे कई आतंकवादी लगभग 30 वर्षों तक कश्मीर में नेता बन खुलेआम घूमते रहे पर कांग्रेस सरकार ने कभी इन पर कोई एक्शन नहीं लिया 2014 में कांग्रेस सरकार के जाने के बाद मोदी सरकार में इन आतंकवादियों पर शिकंजा कसना शुरू हुआ हाल ही में मोदी सरकार द्वारा कश्मीर की आर्टिकल 370 को भी ख़त्म कर दिया है जिसमें कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था जिसके ख़तम ही इन जिहादियों के मंसूबों पर पानी फिर गया ।